आयुर्वेद में किसी भी बीमारी का इलाज करने के लिए जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. कई बार इन जड़ी-बूटियों को दवा के रूप में दिया जाता है, तो कई बार इन्हें भस्म बनाकर उपयोग में लाया जाता है. भारत में कई तरह के भस्मों का प्रयोग रोगों का इलाज करने के लिए किया जाता है. इसमें वंग भस्म भी शामिल है. वंग भस्म में खनिज और धातु शामिल होते हैं. वंग भस्म शरीर में विषाक्त पैदा नहीं करती है और आसानी से पच जाती है. इस औषधि का उपयोग मूत्र और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जा सकता है. वंग भस्म कम खुराक में भी अच्छा असर दिखाती है.

आज इस लेख में आप वंग भस्म के फायदे, उपयोग व नुकसान के बारे में जानेंगे -

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  1. वंग भस्म को कैसे बनाया जाता है?
  2. वंग भस्म के फायदे
  3. वंग भस्म का उपयोग
  4. वंग भस्म के नुकसान व सावधानियां
  5. सारांश
वंग भस्म के फायदे व नुकसान के डॉक्टर

वंग भस्म आयुर्वेदिक दवा है. इसे बंग भस्म भी कहा जाता है. वंग भस्म को टिन मेटल से तैयार किया जाता है. वंग भस्म बनाने के लिए कच्ची वंग (टिन), तिल का तेल (टीला तेल), छाछ (टकरा), गोमूत्र, कांजी, कुल्थी क्वाथ, हरिद्रा चूर्ण, इमली का पाउडर, लिनन रूट का पाउडर, निर्गुंडी पत्र स्वरसा और एलोवेरा का उपयोग किया जाता है. वंग भस्म की तैयार में शोधन, जाराना, भवना और मारन जैसे चरण शामिल हैं. 

वंग भस्म को बनाने के लिए सबसे पहले कच्ची वंग को पिघलाने के लिए गर्म किया जाता है. फिर इसमें अन्य सभी सामग्रियों को लगातार डाला जाता है. इससे कच्ची सामग्री का शुद्धिकरण होता है. इसके बाद इन सभी पदार्थों का अंतिम रूप सामने आता है, इसे ही वंग भस्म कहा जाता है.

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वंग भस्म को वांगका और शुद्ध टिन के नाम से भी जाना जाता है. यह भस्म धातु और खनिज आधारित होती है. आयुर्वेद में वंग भस्म को अहम माना गया है, क्योंकि यह डायबिटीज और अस्थमा समेत कई गंभीर बीमारियों के इलाज में असरदार साबित हो सकती है. फिलहाल, इस भस्म के फायदों के संबंध में कम शोध उपलब्ध हैं. आइए, उपलब्ध संक्षिप्त शोध के आधार पर इसके फायदों के बारे में जानते हैं -

ब्लड शुगर करे कंट्रोल

जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, तो इस स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है. ऐसे में वंग भस्म का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है. वंग भस्म लेने से शुगर लेवल कंट्रोल में रह सकता है. वंग भस्म में इम्यूनोमॉड्यूलेशन गुण पाया जाता है, जिस कारण यह इम्यूनिटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. कुछ रिसर्च के अनुसार, वंग भस्म डायबिटीज के प्रबंधन में सहायता कर सकती है. वहीं, अगर किसी को डायबिटीज है, तो वंग भस्म का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें.

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यूटीआई के लक्षण करे कम

आयुर्वेद में वंग भस्म का उपयोग यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) को ठीक करने के लिए भी किया जा सकता है. पेशाब करते हुए दर्द या जलन होना और पेशाब रुक-रुककर आना यूटीआई के लक्षण होते हैं. अगर किसी को इनमें से कोई भी लक्षण नजर आता है, तो वंग भस्म का सेवन किया जा सकता है. वंग भस्म पेशाब को बढ़ाती है और इंफेक्शन को दूर करने में मदद कर सकती है. इसके नियमित सेवन से पेशाब में होने वाली जलन को भी शांत किया जा सकता है.

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एनीमिया में फायदेमंद

अक्सर महिलाओं को एनीमिया की समस्या का सामना करना पड़ता है. एनीमिया ऐसी स्थिति है, जब रक्त में हीमोग्लोबिन बहुत कम हो जाता है. बार-बार थकान और कमजोरी महसूस होना एनीमिया के लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में वंग भस्म लेना असरदार साबित हो सकता है. वंग भस्म लेने से शरीर को शक्ति मिलती है और हीमोग्लोबिन लेवल भी बढ़ सकता है. एनीमिया के लक्षण नजर आने पर आयुर्वेदिक डॉक्टर वंग भस्म लेने की सलाह दे सकते हैं.

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अस्थमा में लाभकारी

आयुर्वेद में अस्थमा का संपूर्ण इलाज उपलब्ध है. आयुर्वेदिक डॉक्टर अस्थमा के इलाज के लिए वंग भस्म का उपयोग करते हैं. वंग भस्म में मौजूद तत्व फेफड़ों से बलगम को निकालने में मदद करते हैं. इससे फेफड़ों की सफाई होती है और सांस लेने में आसानी हो सकती है. वंग भस्म श्वसन प्रणाली से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने में उपयोगी हो सकती है. साथ ही कफ दोष को संतुलित कर सकती है.

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वंग भस्म को कई तरह के खनिज और धातुओं से मिलकर बनाया जाता है. यही कारण है कि इसमें पहले से ही कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. वंग भस्म को कई तरीकों से लिया जा सकता है -

  • वंग भस्म को अकेले लिया जा सकता है.
  • वंग भस्म को दूसरी आयुर्वेदिक दवाइयों के साथ मिलाकर लिया जा सकता है.
  • आयुर्वेदिक डॉक्टर वंग भस्म को घी के साथ लेने की सलाह दे सकते हैं.
  • इसके अलावा, वंग भस्म को शहद के साथ भी लिया जा सकता है.

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अगर वंग भस्म को डॉक्टर की सलाह पर लिया जाए, तो इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. इसकी खुराक 125-250 मिलीग्राम तक ली जा सकती है. वैसे तो वंग भस्म का उपयोग कई बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता है, लेकिन यह तभी तक लाभकारी होती है, जब तक इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाता है -

  • अगर कोई महिला स्तनपान करवा रही हैं, तो इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें.
  • गर्भवती महिलाओं को भी वंग भस्म का उपयोग बिना डॉक्टर की राय के नहीं करना चाहिए.
  • जो लोग हाई ब्लड प्रेशर की दवाई ले रहे हैं, उन्हें वंग भस्म लेने से बचना चाहिए. 
  • जो लोग पहले से ही डायबिटीज, थायराइड आदि की दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह पर ही वंग भस्म का सेवन करना चाहिए.
  • अगर किसी को किडनी, लिवर या हृदय से जुड़ा कोई गंभीर रोग है, तो भी वंग भस्म का उपयोग करने से बचें.

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वंग भस्म के अनगिनत फायदे हैं, इसके बारे में तो आप जान ही चुके हैं. आयुर्वेद में वंग भस्म का उपयोग एनीमिया, डायबिटीज और अस्थमा समेत कई बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता है. आप वंग भस्म को घी या शहद के साथ मिलाकर ले सकते हैं, लेकिन वंग भस्म का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक मात्रा में वंग भस्म लेने से स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंच सकता है.

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