कस्तूरी बहुत ही सुगंधित और दुर्लभ पदार्थ है. साथ ही यह काफी गुणकारी भी होती है. इसे हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने जाने वाले नर मृग के गुदा से प्राप्त किया जाता है. इस वजह से कस्तूरी काफी महंगी भी होती है. ये चेहरे के मुहांसों को हटाने से लेकर जुकाम और सर्दी तक को ठीक कर सकती है.

कस्तूरी का उपयोग खासतौर पर परफ्यूम बनाने और कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट में किया जाता है. इसकी तासीर गर्म होने के कारण इसका ज्यादा इस्तेमाल स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है.

आज इस लेख में हम कस्तूरी के फायदे, नुकसान, उपयोग व कीमत के बारे में जानेंगे -

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  1. कहां पाई जाती है कस्तूरी
  2. कस्तूरी के फायदे
  3. कस्तूरी से होने वाले नुकसान
  4. सारांश
कस्तूरी के फायदे और नुकसान के डॉक्टर

इसे नर मृग के गुदा में पाई जाने वाली ग्रंथि से हासिल किया जाता है. इसके सुगंधित होने के वजह से प्राचीन समय से कर्म कांडों में सुगंध के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. वेदों में भी कस्तूरी का जिक्र किया गया है. संस्कृत में कस्तूरी के नाम का मतलब अंडकोष बताया गया है. हिमालयी क्षेत्रों में 8 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जंगलों में खास कस्तूरी मृग पाया जाता है. नर मृग को भी कस्तूरी की सुगंध महसूस होती है और वो इसकी तलाश में इधर-उधर घूमता रहता है.

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डॉक्टरी की सलाह पर सीमित रूप से कस्तूरी का सेवन करने से इसके निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं -

  • आयुर्वेद में कस्तूरी को खास महत्व दिया गया है. इसके इस्तेमाल से आंखों की रोशनी तेज हो सकती है.
  • जिन लोगों को स्तंभन दोष या कामेच्छा की कमी होती है, उनके लिए इसका सेवन काफी लाभदायक होता है.
  • आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए कस्तूरी का इस्तेमाल किया गया है.
  • हृदय संबंधी बीमारियों में कस्तूरी को खास उपयोग किया जाता है.
  • कस्तूरी का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स में भी किया जाता है. चेहरे पर निखार लाने के लिए कस्तूरी का इस्तेमाल फेस क्रीम में भी किया जाता है. परफ्यूम या इत्र के लिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है.
  • आमतौर पर दवाओं में कस्तूरी का इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद में 'मृगनाभ्यादिक वटी' नाम की दवा काफी प्रचलित हैं, जो खासतौर से कस्तूरी के अर्क से बनाई जाती है.
  • कस्तूरी का सेवन बहुत कम मात्रा में ही किया जाता है. इसके लिए एक रत्ती या आधा रत्ती के सेवन की ही सलाह दी गई है. बहुत ही कम मात्रा में कस्तूरी का सेवन दूध या मलाई के साथ भी उपयुक्त माना गया है.
  • अत्यंत दुर्लभ और तेज गंध होने की वजह से कस्तूरी से बनाए हुए इत्र और परफ्यूम की कीमतें आसमान छूती हैं.

कस्तूरी के इस्तेमाल से इन समस्याओं से भी निजात मिल सकती है -

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यूं तो कस्तूरी के कई फायदे हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है-

  • इसकी तासीर गर्म होने की वजह से गर्मी के मौसम में इसका सावधानीपूर्वक सेवन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अधिक गर्मी के मौसम में इसका हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है.
  • कस्तूरी का उपयोग उचित मात्रा में करना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा मात्रा में इसका इस्तेमाल करने से चेहरे पर इसका साइड इफेक्ट पड़ता है और चेहरा पीला पड़ने लगता है.
  • कस्तूरी के अधिक इस्तेमाल से इसकी गंध मस्तिष्क पर नकारात्मक असर डालती हैं.
  • इसके अधिक इस्तेमाल से दांतों को भी नुकसान पहुंच सकता है.

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कस्तूरी में मौजूद कई औषधीय गुणों के चलते इसे आयुर्वेद में खास स्थान दिया गया है. बहुत अधिक दुर्लभ होने की वजह इसकी बाजार में कीमत भी बहुत ज्यादा होती है, लेकिन इससे होने वाले फायदों का कोई मोल नहीं है. कस्तूरी दमा का रोग, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, इंफर्टिलिटी और चेहरे की झुर्रियों को दूर करने का काम तो करता ही है साथ ही साथ इसका सौंदर्य प्रसाधनों में भी खास इस्तेमाल किया जाता है. बाजार में मौजूद कस्तूरी के अर्क से बनाई जाने वाली दवाओं का सेवन करने से पहले आपको अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि इसके गलत इस्तेमाल से आपके शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

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