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इंसोम्निया यानी अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति को ठीक तरह से नींद नहीं आती है. वैसे तो इंसोम्निया किसी को भी हो सकता है, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अनिद्रा की समस्या होने की आशंका अधिक होती है. 5 में से 1 पुरुष की तुलना में 4 में से 1 महिला में इंसोम्निया के लक्षण महसूस होते हैं.

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अध्ययनों से भी पता चलता है कि महिलाओं को सोने में अधिक समय लगता है और कम समय में ही उनकी नींद टूट जाती है. महिलाओं को पुरुषों की तुलना में उठने के बाद थकान भी अधिक महसूस होती है. सोने में परेशानी, रात भर सोते रहने में दिक्कत और सुबह जल्दी न उठ पाना महिलाओं में होने वाले इंसोम्निया के लक्षण हो सकते हैं. महिलाओं को इंसोम्निया कुछ समस्याओं या हार्मोन में बदलाव की वजह से हो सकता है.

आज इस लेख में आप महिलाओं में होने वाले इंसोम्निया के कारण व इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. महिलाओं में इंसोम्निया के कारण
  2. महिलाओं में इंसोम्निया का इलाज
  3. सारांश
महिलाओं को इंसोम्निया होने के कारण व इलाज के डॉक्टर

अध्ययनों में साबित हुआ है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं इंसोम्निया से अधिक परेशान रहती हैं. हार्मोनल बदलाव और कुछ मेडिकल कंडीशन महिलाओं में होने वाले इंसोम्निया का कारण हो सकते हैं. महिलाओं में इंसोम्निया के कारण इस प्रकार हैं -

हार्मोनल कारण

महिलाओं को हर स्टेज पर हार्मोनल बदलावों से गुजरना पड़ता है. हार्मोनल बदलावों की वजह से उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसी के साथ हार्मोनल बदलाव इंसोम्निया का कारण भी बन सकते हैं, क्योंकि महिलाओं को कम से कम 7 घंटे की नींद चाहिए होती है, जो वो नहीं ले पाती हैं. हार्मोनल बदलाव के कारण क्या-क्या समस्याएं आती हैं, आइए जानते हैं -

  • पीरियड्स - महिलाओं को पीरियड्स से पहले कुछ दिनों तक अनिद्रा का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल, पीरियड्स से पहले शरीर में प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है. इसकी वजह से प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) के लक्षण महसूस होने लगते हैं. अगर किसी महिला को प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (पीएमएस का गंभीर प्रकार) है, तो उसमें इंसोम्निया होने का जोखिम बढ़ सकता है.
  • प्रेगनेंसी - प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान हार्मोन रिलीज होते हैं. इस स्थिति में महिला को अधिक नींद आ सकती है. वहीं, तीसरी तिमाही तक शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है, इस स्थिति में रात को सोने और सोते रहने में दिक्कत हो सकती है. तीसरी तिमाही में रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है, जिसके कारण नींद खराब हो सकती है.
  • मेनोपॉज - सभी महिलाएं एक उम्र के बाद मेनोपॉज से गुजरती हैं. मेनोपॉज वह स्थिति होती है, जिसमें महिलाओं को मासिक धर्म आना पूरी तरह से बंद हो जाता है. मेनोपॉज में महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है. इस स्थिति में महिलाओं को रात में अधिक पसीना आ सकता है, हॉट फ्लैशेस हो सकता है और रात को नींद आने में दिक्कत हो सकती है. 

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हेल्थ कंडीशन

हार्मोनल बदलावों के साथ ही महिलाओं की कुछ हेल्थ कंडीशन भी इंसोम्निया का कारण बन सकते हैं, जो इस प्रकार है -

  • पीसीओएस - पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम अनियमित पीरियड्स का कारण बनता है. इस स्थिति में महिलाओं के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर अधिक और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है. पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है. हार्मोनल असंतुलन नींद की समस्या को बिगाड़ सकता है. अगर किसी महिला को पीसीओएस है, तो उसे स्लीप एपनिया होने का जोखिम भी अधिक रहता है. स्लीप एपनिया वह स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति को सोते समय कुछ सेकंड के लिए सांस नहीं आती है. स्लीप एपनिया होने से नींद बार-बार खुल सकती है और इंसोम्निया के लक्षण पैदा हो सकते हैं.
  • फाइब्रोमायल्जिया - फाइब्रोमायल्जिया के मामले पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिलते हैं. यह एक ऐसा डिसऑर्डर है, जिसमें पूरे शरीर में मांसपेशियों में दर्द होने लगता है. मांसपेशियों का दर्द नींद को प्रभावित कर सकता है. इस स्थिति में महिलाओं को सोने और लंबे समय तक सोते रहने में मुश्किल हो सकती है.
  • बार-बार पेशाब आना - बार-बार पेशाब आने की समस्या भी महिलाओं में इंसोम्निया का एक कारण बन सकता है. यह समस्या भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है. इस स्थिति में मूत्राशय पर नियंत्रण नहीं हो पाता है. यह अक्सर पीरियड्स, प्रेगनेंसी, डिलीवरी और मेनोपॉज के दौरान होने वाले बदलावों के कारण हो सकता है. बार-बार पेशाब आने पर रात को नींद टूट सकती है. ऐसे में महिलाओं की नींद पूरी नहीं होती है और वे अगले दिन थकान महसूस कर सकती हैं.
  • डिप्रेशन और एंग्जायटी - पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण दिखने की आशंका अधिक होती है. नींद न आना डिप्रेशन और एंग्जायटी का सबसे आम लक्षण माना जाता है. डिप्रेशन या तनाव महसूस करने पर महिलाओं को रात के समय नींद आने में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में डिप्रेशन इंसोम्निया का कारण बन जाता है.

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महिलाओं में इंसोम्निया होना आम होता है. यह कई कारणों से हो सकता है. इसलिए, इंसोम्निया का इलाज भी इसके कारणों पर ही निर्भर करता है. महिलाओं में होने वाले इंसोम्निया का इलाज इस प्रकार हैं -

एक्सरसाइज करें

इंसोम्निया का इलाज करने के लिए आपको रोजाना अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज को जरूर शामिल करना चाहिए. दरअसल, एक्सरसाइज करने से आप अधिक थकान महसूस कर सकते हैं. इसकी वजह से आपको रात को अच्छी और गहरी नींद आ सकती है. इसके साथ ही एक्सरसाइज करने से स्ट्रेस भी कम होता है. स्ट्रेस कम होता है, तो नींद खुद ही आ जाती है. आप अच्छी नींद के लिए योग और मेडिटेशन भी कर सकते हैं.

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सोने का सही तरीका

अगर महिला को तीसरी तिमाही के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से नींद नहीं आ रही है, तो महिला को अपने सोने के तरीके को बदलना चाहिए. इसके लिए महिला पैरों पर तकिया रख सकती है, जिससे पेट को सहारा मिलता है. अगर महिला को खर्राटे आदि आते हैं, तो सिर को ऊंचा करके सोने की कोशिश करें.

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हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी

कई बार हार्मोनल बदलावों की वजह से महिलाओं को इंसोम्निया का सामना करना पड़ता है. इस स्थिति में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद से इसका इलाज किया जा सकता है. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी भी इंसोम्निया का इलाज कर सकती है. इस थेरेपी की मदद से मनोचिकित्सक रोगी के तनाव को कम करने की कोशिश करते हैं और अच्छी नींद दिलाने में मदद करते हैं.

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दवाइयां

अगर इंसोम्निया के लक्षण बिगड़ते जाते हैं, तो डॉक्टर कुछ दवाइयां लिख सकते हैं. इस स्थिति में डॉक्टर नींद आने की दवाइयां (स्लीपिंग पिल्स) खाने की सलाह दे सकते हैं या फिर एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां भी दे सकते हैं. इससे तनाव कम करके नींद आने में मदद मिल सकती है. इन दवाइयों का सेवन सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही करें.

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अगर किसी महिला को नींद नहीं आ रही है, तो अपने डॉक्टर से बात करें. डॉक्टर इंसोम्निया के कारणों को जानकर इसका इलाज कर सकते हैं. कुछ दवाइयां व अच्छी जीवनशैली को अपनाकर इंसोम्निया के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से भी इंसोम्निया का इलाज हो सकता हैं.

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