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हाइपोथायरायडिज्म ऐसी स्थिति होती है, जिसमें थायराइड ग्रंथि थायराइड हार्मोन का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं कर पाती है. इस स्थिति को अंडरएक्टिव थायराइड के रूप में भी जाना जाता है. यह मोटापा, जोड़ों में दर्द और हृदय रोगों का कारण बन सकता है. हाइपोथायरायडिज्म व्यक्ति के हर अंग को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. इसमें प्रजनन प्रणाली भी शामिल होती है. हाइपोथायरायडिज्म महिला की प्रजनन क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है और बांझपन का कारण बन सकता है. ऐसे में अगर किसी महिला को हाइपोथायरायडिज्म है, तो उसे गर्भधारण करने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

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आज इस लेख में आप हाइपोथायरायडिज्म और बांझपन के बीच संबंध के बारे में विस्तार से जानेंगे -

(और पढ़ें - महिला बांझपन की दवा)

 
  1. हाइपोथायरायडिज्म और बांझपन के बीच संबंध
  2. हाइपोथायरायडिज्म से प्रभावित प्रजनन क्षमता का इलाज
  3. हाइपोथायरायडिज्म और गर्भावस्था
  4. सारांश
हाइपोथायरायडिज्म और बांझपन के बीच संबंध के डॉक्टर

हाइपथायरायडिज्म बांझपन का कारण बन सकता है. अगर किसी महिला को हाइपोथायरायडिज्म है, तो उसके लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है. हाइपोथायरायडिज्म से ग्रस्त महिलाओं के गर्भवती होने की संभावना काफी कम हो जाती है. इन महिलाओं को गर्भधारण करने में अधिक समय लग सकता है.

दरअसल, हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि कुछ जरूरी हार्मोंस का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं कर पाती है. ऐसे में जब थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम होता है, तो अंडाशय से अंडा रिलीज नहीं हो पाता है. इस स्थिति में प्रजनन क्षमता कम हो सकती है. आसान भाषा में समझें, तो  हाइपोथायरायडिज्म वाली महिलाएं तय समय पर ओवुलेट नहीं कर पाती हैं, जबकि गर्भवती होने के लिए ओवुलेट करना जरूरी होता है. 

इसके अलावा, जब किसी महिला को हाइपोथायरायडिज्म होता है, तो उसे कुछ ऑटोइम्यून या पिट्यूटरी डिसऑर्डर हो सकते हैं. ये बीमारियां भी प्रजनन क्षमता को कम कर सकती हैं.

हाइपोथायरायडिज्म पुरुषों की प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है. हाइपोथायरायडिज्म वाले पुरुषों में कामेच्छा कम होने लगती है. साथ ही शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है, जो कि महिला पार्टनर को गर्भवती करने के लिए जरूरी होते हैं.

हाइपोथायरायडिज्म पुरुषों और महिलाओं दोनों में थकान पैदा कर सकता है. जब कोई व्यक्ति थका हुआ महसूस करता है, तो उसे संभोग करना मुश्किल हो जाता है. जब सही और बेहतर तरीके से सेक्स नहीं कर पाता है, तो गर्भवती होना कठिन हो सकता है.

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अगर कोई महिला हाइपोथायरायडिज्म की वजह से बांझपन का सामना कर रहा है, तो उसके लिए प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए सबसे पहले हाइपोथायरायडिज्म का इलाज कराना जरूरी होता है. हाइपोथायरायडिज्म का इलाज भी आसानी से किया जा सकता है. जब थायराइड का स्तर सामान्य हो जाता है, तो महिला गर्भवती होने में सक्षम हो सकती है. थायराइड की दवा लेना शुरू करने के 6 सप्ताह बाद महिला गर्भधारण कर सकती है. 

एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि थायराइड की दवाइयां लेने से प्रजनन क्षमता बढ़ सकती है और गर्भधारण हो सकता है. साथ ही जब थायराइड का स्तर सामान्य हो जाता है, तो गर्भधारण के बाद गर्भपात का जोखिम भी कम हो जाता है.

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जब एक बार महिला गर्भधारण कर लेती है, तो यह जरूरी हो जाता है कि पूरी गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर थायराइड हार्मोन को चेक किया जाए. जरूर पड़ने पर डॉक्टर टीएसएच को कंट्राेल करने के लिए कुछ दवाएं दे सकते हैं. पूरी गर्भावस्था के दौरान थायराइड को चेक करना इसलिए जरूरी होती है, क्योंकि हाइपोथायरायडिज्म के गंभीर रूप लेने से महिला को मिसकैरेज का सामना करना पड़ सकता है.

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अगर कोई महिला हाइपोथायरायडिज्म से ग्रस्त है और गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, तो उसे कई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है. हाइपोथायरायडिज्म के चलते महिला ओवुलेट नहीं कर पाती हैं, ऐसे में गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए, अगर किसी भी महिला को हाइपोथायरायडिज्म है, तो उसके लिए तुरंत इलाज करवाना जरूरी होता है. हाइपोथायरायडिज्म के बाद गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है.

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